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Geography of Rajsthan Notes-canals in rajasthan part-1

Geography of Rajsthan Notes-canals in rajasthan part-1

राजस्थान की प्रमुख नहरें भाग-1

राजस्थान एक सूखाग्रस्त राज्य है, ऐसे में इसकी सिंचाई सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करने के लिये तालाबों और कुंओं के साथ ही नहरे एक बड़े स्रोत के तौर पर विकसित हुई हैं। यहां हम नहरों के बारे में परीक्षा उपयोगी जानकारी की पहली पोस्ट आपसे साझा कर रहे हैं। इस पोस्ट में हम पहली 6 प्रमुख नहरों गंगनहर, भरतपुर नहर, गुड़गांव नहर, इंदिरा गांधी नहर, सिद्धमुख नोहर और नर्मदा परियोजना की जानकारी दे रहे हैं। अगर आपके कोई सुझाव हैं तो हमारे फेसबुक पेज पर बता सकते हैं।
-कुलदीप सिंह चौहान
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गंगनहर  

(1) राजस्थान के पश्चिमी भाग में बारिश बहुत कम होती है अतः पानी की कमी को दूर करने के लिए बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह द्वारा गंग नहर का निर्माण करवाया गया था। 

(2) 1927 में सतलज नदी से फिरोजपुर के निकट हुसैनी वाला से यह नहर निकाली गई। 

(3) पंजाब में बहती हुई यह नहर शिवपुर हैड खक्खां के निकट राजस्थान में प्रवेश करती है। 

(4) मुख्य नहर की लम्बाई फिरोजपुर से शिवपुर के बीच 129 कि.मी. है जिसमें से 112 कि.मी. पंजाब में व 17 कि.मी. राजस्थान में है। इसकी वितरिकाओं की कुल लम्बाई 1280 कि.मी. है। 

(5) इससे लगभग 3.08 लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। वर्षभर सिंचाई होेने के कारण गन्ना, माल्टा, कपास की खेती होती है। 

(6) गंगनहर की मरम्मत या पुननिर्माण के दौरान गंगानगर जिले में सिंचाई व पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए गंगनहर लिंक चैनल का निर्माण किया गया है, जिसकी लम्बाई 80 कि.मी. है। 

(7) गंगनहर से सर्वाधिक लाभान्वित जिला गंगानगर है। 

भरतपुर नहर

(1) यह नहर 1964 में बनकर तैयार हुई। 

(2) इसे पश्चिमी यमुना नहर से निकाला गया है। 

(3) कुल 28 कि.मी. लम्बी इस नहर में से 16 कि.मी. उत्तर प्रदेश में है। 

(4) इससे राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र (भरतपुर) को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। 

गुडगांव नहर

(1) यह हरियाणा व राजस्थान सरकार की संयुक्त योजना है। 

(2) इस नहर के निर्माण का लक्ष्य मानसून काल में यमुना नदी के पानी का उपयोग करना है। 

(3) यमुना नदी से ओखला के निकट से निकलकर भरतपुर के जुरहरा (कामां) के समीप राज्य में प्रवेश करती है। 

(4) नहर की राज्य में कुल लम्बाई 58 कि.मी. है। 

इंदिरा गांधी नहर परियोजना 

(1) राजस्थान में रेगिस्तानी इलाकों में पेयजल की आपूर्ति करने, व्यर्थ भूमि का उपयोग करने व अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर आबादी बसाने के उद्देश्य से इस नहर का निर्माण किया गया था। 

(2) फिरोजपुर के निकट सतलज एवं व्यास नदी के संगम पर स्थित हरिके बैराज से इस नहर को नकाला गया है। आरंभ में इस नहर का नाम ’राजस्थान नहर’ कहा जाता है। 1984 में इसका नामकरण इंदिरा गांधी नहर के रूप में किया गया। 

(3) यह एशिया की सबसे बड़़ी मानव निर्मित नहर है जिसकी कुल लम्बाई 649 कि.मी. है। जिसमें से 169 कि.मी. पंजाब में तथा 14 कि.मी. हरियाणा में व शेष राजस्थान में है। 

(4) नहर का सुझाव तत्कालीन बीकानेर राज्य के इंजीनियर श्री कंवर सेन ने भारत सरकार को दिया था। 

(5) नहर के दो चरणों में पूरा किया गया जो क्रमश: राजस्थान फीडर व मुख्य नहर है। 

(6) राजस्थान फीडर आरम्भिक स्थल से मसीतावाली तक तथा मुख्य नहर मसीतावाली से मोहनगढ़ के अन्तिम बिन्दु तक है जो क्रमश: 204 कि.मी. व 445 कि.मी. है। बाद में इसे बाड़मेर के गडरा रोड तक बढ़ा दिया गया है। 

(7) इस नहर के द्वारा थार के मरूस्थल में सिंचित क्षेत्र का विकास करने के लिए विभिन्न शाखाएं तथा लिफ्ट नहर निकाली गई है। 

(8) पश्चिमी सीमा पर ढाल के अनुरूप तथा पूर्वी सीमा पर ऊंचाई अधिक होनेे के कारण जल को ऊपर उठाकर छोटी नहरों में डाला जाता है जिसे लिफ्ट नहर कहते है, के माध्यम से विभिन्न कस्बों तथा शहरों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। 

राजस्थान में लिफ्ट नहरों की कुल संख्या 7 है जो निम्नानुसार है- 
(क) कोलायत लिफ्ट नहर- डाॅ. करणी सिंह लिफ्ट नहर 
(ख) फलौदी लिफ्ट नहर - गुरू जम्भेश्वर लिफ्ट नहर
(ग) बीकानेर लूणकरणसर - कंवर सेन लिफ्ट नहर
(घ) पोखरण - जय नारायण व्यास लिफ्ट परियोजना
(च) बांगडसर - वीर तेजाजी लिफ्ट परियोजना
(छ) गजनेर - पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट परियोजना
(ज) गंधेली (नोहर) साहबा - चैधरी कुम्भाराम आर्य लिफ्ट परियोजना

(9) जैसलमेर में सागरमल गोपा व शहीद बीरबल शाखाओं का निर्माण किया गया है। 

(10) नहर से 9 जिलों, 29 कस्बों व 3461 गांवों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है तथा लगभग 16 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की जा रही है। 

(11) इंदिरा गांधी नहर में पानी का बहाव नियमित एवं पर्याप्त मात्रा में बनाए रखने के लिए निम्नलिखित बांध बनाये गये हैं:
(अ) व्यास एवं सतलज नदी पर बांध 
(ब) रावी एवं व्यास नदियों पर लिंक तथा 
(स) व्यास नदी पर पोंग बांध 

(12) योजना से रेगिस्तान के प्रसार में रोक, पेयजल उपलब्धता, कृृषि उत्पादन में वृद्धि अधिवास विस्तार के साथ विद्युत उत्पादन भी किया जाता है। 

(13) योजना का सबसे बड़ा नुकसान वाटर लॅगिंग है, जिसे स्थानीय भाषा में सेम की समस्या कहा जाता है। पानी भूमि के अन्दर रिस कर नहीं जाता (बड़ा कारण सिंचित क्षेत्र में जिप्सम पट्टी होना है) इस कारण दलदल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और भूमि कृषि योग्य नहीं रह पाती। 

सिद्धमुख नोहर परियोजना 

(1) रावी-व्यास के अतिरिक्त जल का उपयोग करने के लिए इस परियोजना का निर्माण किया गया। 

(2) इससे हनुमानगढ़ की नोहर-भादरा तथा चूरू जिले की तारा नगर व राजगढ़ तहसीलों में 33 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। 

(3) परियोजना का कार्य यूरोपीय संघ की मदद से आरंभ किया गया था, लेकिन पोकरण परमाणु परीक्षण के कारण विदेशी मदद बंद होने से नाबार्ड की मदद से उक्त परियोजना को पूर्ण किया गया। 

(4) नहर का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी के नाम से किया गया है। 

नर्मदा परियोजना 

(1) गुजरात राज्य की सरदार सरोवर बांध परियोजना एक वृहद परियोजना है जिस पर नर्मदा मुख्य नहर बनाकर पानी राजस्थान तक पहुंचाया गया है। 

(2) 2008 में आरंभ इस परियोजना से बाड़मेर व जालौर जिले में पेयजल व सिंचाई की सुविधा उलपब्ध होगी। (2.46 लाख है. क्षेत्र की सिंचाई होगी)

(3) जालौर जिला इस योजना से सर्वाधिक लाभान्वित जिला है। 

(4) नर्मदा नहर पर सांचैर, भादरिया व पनोरिया लिफ्ट बनाई गई है। 

(5) यह राजस्थान की पहली नहर है जिसमें बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति व स्प्रिंकलर से सिंचाई को अनिवार्य किया गया है। 

(6) नहर की कुल लम्बाई 532 कि.मी. है जिसमें से 74 कि.मी. राजस्थान में है। 

(7) नहर राजस्थान में जालौर जिले की सांचैर तहसील के सीलू गांव में प्रवेश करती है। 

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