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Download Districts of Rajasthan: Zila Darshan: Sikar

जिला दर्शन: सीकर

शेखावाटी स्थित सीकर जिला इतिहास, संस्कृति, भूगोल, पुरातत्व एवं दर्शनीय स्थलों के कारण अपना विशिष्ट स्थान रखता है। राजस्थान में जिलों के गठन के समय जयपुर राज्य के सीकर ठिकाने के नाम पर ही जिले का नामकरण हुआ। 

तत्कालीन सीकर ठिकाने की सीमाओं में जयपुर राज्य की तोरावाटी निजामत एवं सवाई रामगढ़ तहसील का मुख्यालय नीमकाथाना, सांभर निजामत की दांतारामगढ़ तहसील एवं श्री माधोपुर तथा खण्डेला ठिकाना सम्मिलित कर वर्तमान रूप दिया गया। 

सीकर में हड़प्पापूर्व ताम्रयुगीन सभ्यता के अवषेष मिलते है। यहां के मध्यकालीन दुर्ग, नगर-परकोटे, राजप्रासाद, देव-मन्दिर, जुझारों की देवलियां एवं छतरियां भी विश्व  प्रसिद्ध है। 

भौगोलिक स्थिति 

सीकर जिला राजस्थान  के उत्तर-पूर्वी भाग में 27.21 से 28.12 उत्तरी अक्षांश तथा 74".44 से 75".25’ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। 

समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 432.31 मीटर है। इसके उत्तर में झुंझुनूं, उत्तर-पश्चिम में चूरू, दक्षिण-पश्चिम में नागौर और दक्षिण-पूर्व में जयपुर जिले की सीमायें लगती है। यह 7732 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 

राजा रायसल के पुत्र तिरमल को मुगल बादशाह अकबर ने अहमदाबाद के युद्ध में अद्भुत वीरत्व प्रदर्शन के लिए मनसब, राव की पदवी तथा काॅसली-नागौर के परगने दिये। 

ग्राम बीरभान का बास (वर्तमान सीकर नगर) ग्राम में वि.सं. 1744 में राव दौलतसिंह ने स्थायी निवास हेतु गढ़ तथा मोहनजी का मंदिर बनवाया और सीकर नगर की नींव रखी। 

राष्ट्रीय चेतना एवं अंगेजी शासन से मुक्ति आन्दोलन के बीज रूप में बठोठ-पाटोदा ग्राम के डूंगजी जवाहरजी ने प्रथम स्वाधीनता संग्राम के काल में अंगेजी फौजों से लोहा लिया। 

वीर तांत्या टोपे ने भी इस क्षेत्र में प्रवास कर जन चेतना को प्रभावित करते हुए जनवरी, 1859 में सीकर के निकट कर्नल होम्स की सेनाओं को परास्त किया। 

महामना मदनमोहन मालवीय एवं महात्मा गांधी के अनुयायी जमनालाल बजाज एवं उनके सहयोगियों की जन्म एवं कर्म स्थली के रूप में यह क्षेत्र राष्ट्रीय चेतना की धारा से पुनः जुड़ गया। 

गांधीजी की प्रेरणा से बारडोली, बिजौलिया आंदोलन के समय में ही रींगस में भी जन चेतना प्रारम्भ हुई तथा 1926 में रींगस तथा फतेहपुर नगरों में खादी भण्डार खुले एवं 1930 में रामगढ़ शेखावाटी में उत्साही प्रवासी युवकों द्वारा स्थापित युवक संघ ने भी स्वदेशी जागृति का प्रयास किया। 

प्रशासनिक ढांचा 

जिले में 9 उपखण्ड और 9 तहसीलें फतेहपुर, नीमकाथाना, सीकर, लक्ष्मणगढ़, श्रीमाधोपुर, दांतारामगढ़, धोद, खण्डेला, रामगढ़ शेखावाटी हैं। 

इसके अलावा जिले में 9 पंचायत समितियां फतेहपुर, नीमकाथाना, लक्ष्मणगढ़, श्रीमाधोपुर, दांतारामगढ़, धोद, खण्डेला, पीपराली और पाटन हैं। 

इसके अलावा जिले में जिले में एक नगर परिषद् सीकर और 8 नगरपालिकायें रामगढ़ शेखावाटी, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़़, लोसल, रींगस, नीमकाथाना, श्रीमाधोपुर, खण्डेला हैं। जिले में कुल 343 ग्राम पंचायत हैं। 

दर्शनीय स्थल

हर्ष गिरी या हर्ष पर्वत 

सीकर नगर में 14 किलोमीटर दक्षिण में अरावली के 3,110 फीट ऊंचे पहाड़ी शिखर हर्ष गिरि पर दसवीं शताब्दी का प्राचीन शिवालय है। 

पौराणिक मान्यता  है कि इसी स्थान पर त्रिपुर वध  के बाद इन्द्र द्वारा भगवान शिव की हर्ष नाम से स्तुति की गई। 

शिवालय के दक्षिण में स्थित हर्षनाथ भैरव का मंदिर एवं बावड़ी भी है। भव्य मंदिर के सामने एक नया शिव मंदिर है। 

हर्ष गिरि की ऊंचाई से सूर्यास्त का दृश्य तथा पूर्व की पहाड़ी के साथ विस्तृत रैवासा झील बड़ी मनोरम लगती है। 

जीण माता 

जनश्रुतियों में जयन्ती देवी की शक्ति पीठ के रूप में बहुश्रुत जीण माता का स्थान सीकर से 30 किलोमीटर दक्षिण में अरावली में स्थित है। 

इस स्थान पर दसवीं सदी का जीणमाता का भव्य मंदिर है, जहां चैत्र एवं आश्विन नवरात्रों में मेले   लगते हैं जिनमें लाखों दर्शनार्थी उपस्थित होकर श्रद्धाभाव प्रकट करते हैं।

शाकम्भरी 

सीकर से 60 किलोमीटर दूर शाकम्भरी शक्ति पीठ है। वि.सं. 749 में चौहान राजा दुर्लभराज के भतीजे तथा शिवहरि के पुत्र सिद्धराज ने शक्रदेवी (शाकम्भरी) का मण्डप बनवाया । 

तीन ओर से पहाड़ों से घिरा शाकम्भरी माता का भव्य देवालय है जहां मण्डप के गर्भगृह में शाकम्भरी तथा काली की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं। 

मंदिर के पीछे सात जल कुण्डों में स्वच्छ जलधारा प्रवाहित होती रहती है। चैत्र व आश्विन में यहां मेला लगता है। 

खाटू श्यामजी

सीकर से 65 किलोमीटर दूर खाटू ग्राम में श्यामजी का प्रसिद्ध मंदिर है। 

यहां फाल्गुन एवं कार्तिक में लगने वाले मेलों में लाखों दर्शनार्थी अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। 

मंदिर से जुड़ा श्याम बगीचा एवं श्यामकुण्ड भी दर्शनीय स्थल है। यात्रियों के आवास हेतु अनेकों धर्मशालायें यहां निर्मित हैं। 

खाटू ग्राम में पुरातत्व महत्व के  प्राचीन महलों के अवशेष एवं पुरानी बावड़ी दर्शनीय है। 

गणेश्वर 

नीमकाथाना से 15 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में गणेश्वर ग्राम में प्राचीन शिवालय तथा पहाड़ में ऊष्ण जल का निरन्तर प्रवाही स्त्रोत है, जहां लोग स्नान कर चौड़े  लाभ प्राप्त करते हैं। इस स्थल पर प्राचीन शिवालय तथा कई मंदिर हैं।

प्रीतमपुरी 

काॅवट से 5 किलोमीटर दूर अरावली श्रेणियों के बीच प्रीतमपुरी की प्रसिद्ध झील है। 

सात किलोमीटर लम्बे तथा 5 किलोमीटर चौडे क्षेत्र में फैली यह सुरम्य झील पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है।

रैवासा धाम 

गोरिया रेलवे स्टेशन से 4 किलोमीटर दूर अरावली श्रेणी की तलहटी में स्थित यह स्थान मध्य युग में चन्देल शासकों तथा तदन्तर राजा रायसल दरबारी के अधिकार क्षेत्र में था। 

पहाड़ की चोटी पर प्राचीन किला बना हुआ है। ग्राम में काले पत्थर की आकर्षक मूर्ति से प्रतिष्ठित कृष्ण का मंदिर लगभग सात सौ वर्ष पुराना है। 

साहित्य एवं संगीत

साहित्यिक परम्परा में विक्रम की सोलहवीं सदी से प्राप्त रचनाओं में रैवासा  स्थित वैष्णव सम्प्रदाय की रामानन्दी आचार्य पीठ के अग्रदास (भक्तमाल-रचियता नाथा दास के गुरू) शिशु ग्राम की नृसिंहलीला के प्रणेता झांझूदास की कृतियां हैं। 

राजा रायसल के मंत्री देवीदास की राजनीति विषयक कविता तथा फतेहपुर की नवाबी वंश में कवयित्री ताज दीवान, दौलत खां तथा न्यामत खां जान कवि के काव्य एवं विविध विषयक ग्रन्थ लिखे। 

फतेहपुर में ही महाकवि सुन्दरदास एवं चतुरदास ने अनेक रचनाएं लिखीं। 

कविवर कृपाराम खिड़ियां ने रीति काव्य और शक्ति-भक्ति रचनाओं के अतिरिक्त राजिया  रा सोरठा, प्रसिद्ध लोकनीति काव्य लिखा। 

किशनदास खिडिया ने बिहारी सतसई की धनाक्षरी रूपान्तर, सुखदान कविया ने पाबू प्रकाश, गोपाल कविया ने लावा रासो तथा रामदयाल कविया ने कीरत कीर्ति-प्रकाश काव्य ग्रंथों की रचना की। 

प्रसिद्ध करूण रस काव्य द्रौपदी विनय के रचयिता रामनाथ कविया तथा मत्स्य की मीरां, सम्मान बाई सीकर क्षेत्र से ही सम्बन्धित रही हैं। 


शास्त्रीय संगीत के विकास में भी सीकर के कलावन्तों का योगदान रहा है। आगरा घराने की कला से जुडे़ उस्ताद अब्दुल्ला खां पारंगत गायक तथा सुबारक अली खां सिद्धहस्त तबलावादक हुए। 

सारंगी वादकों में उस्ताद नजीर खां, मुनरी खां, सुलतान खां, महबूब खां, शम्भू खां व तबलावादकों में कूदन के उस्ताद घसीट खां, फैयाज खां, हिदायत खां, शमीम खां प्रसिद्ध हुए हैं। 

मेले और त्योहार 

यहां के प्रमुख मेलों में फाल्गुन मास में आयोजित खाटू श्यामजी तथा जीण माता के मेले हैं। 

वर्ष में दो बार चैत्र एवं आश्विन में जीण माता का मेला भरता है। शाकम्भरी माता के भव्य मंदिर में चैत्र और आश्विन नवरात्रा में भी विशाल मेलों का आयोजन होता है। 

फतेहपुर में ख्वाजा नजमुद्दीनशाह की दरगाह पर उर्स के समय भी जायरीन पहुंचते हैं। 

इसके अलवा शक्ति स्थल ढांढ़ण, हर्ष में हर्षनाथ का मेला, धोद में पशु मेला के अलावा अनेक स्थानों पर हनुमानजी के मेले आयोजित होते हैं।


काम के नोट्स:

जिला दर्शन अजमेर
जिला दर्शन अलवर
जिला दर्शन बारां
जिला दर्शन बाड़मेर

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