Rajasthan gk in hindi-architecture of rajasthan part-1

Rajasthan gk in hindi-architecture of rajasthan part-1

राजस्थान का स्थापत्य—1

➤ कालीबंगा, आहड़, गिलूण्ड, बैराठ, नोह, नगरी आदि राजस्थान के ऐसे पुरातात्विक स्थल हैं, जहाँ आवासों का पहले पहल निर्माण हुआ।
➤ स्थापत्य एवं रक्षा की दृष्टि से राजस्थान के ऐतिहासिक भवन, जिनका निर्माण पूर्व-मध्यकाल में हुआ, बेजोड़ थे।
➤ राजपूत संस्कृति के अभ्युदय के कारण वीरता एवं रक्षा के प्रतीक किलों का निर्माण तेजी से हुआ।
➤ राजस्थान की भवन निर्माण कला में उपयोगिता एवं समन्वयात्मकता की भावना को केन्द्र बिन्दु में रखा गया है।
➤ साथ ही शिल्प सौष्ठव, अलंकरण एवं सुरक्षा की भावना का निर्माताओं ने ध्यान रखा है।
➤ स्थापत्य का वैविध्य राजस्थान की वास्तुकला की विशेषता है।

➤ राजस्थान में स्थापत्य कला का विकास गुप्तों के समय अपने उत्कर्ष पर था।
➤ हूणों के आक्रमण से राजस्थान के स्थापत्य को नुकसान हुआ।
➤ पूर्वमध्यकाल में (700-1000ई.) जब गुर्जर-प्रतिहार शासकों ने राजस्थान क्षेत्र पर अपना शासन जमाया तो वे स्थापत्य के विकास के मामले में गुप्तों के उत्तराधिकारी साबित हुए।
➤ इस काल में बडी़ संख्या में मन्दिर बनें, जो गुर्जर-प्रतिहार शैली अथवा ‘महामारू’ शैली के नाम से जाने जाते हैं।
➤ जैम्स बर्जेस तथा जैम्स फर्ग्युसन ने इन मन्दिरों के लिए आर्यावर्त शैली या इण्डोआर्यन शैली का प्रयोग किया है।
➤ कला शिल्प, भाव प्रधानता, अंग सौण्ठव, प्रतीकात्मक तथा धर्म प्रधानता इस शैली की विशेषता रही है।

काम के नोट्स:



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